म्यांमार की पूर्व शिक्षिका चेन्नई की सड़कों पर भीख मांग रही थीं। एक वीडियो ने सब बदल दिया।
मर्लिन कई दशक पहले शादी के बाद म्यांमार से भारत आई थीं। इससे पहले वे सालों तक अंग्रेज़ी पढ़ाती रहीं। लेकिन जब उनका सहारा बने परिवार के लोग एक-एक करके गुज़र गए, तो उनके पास न कोई कमाई बची, न कोई सहारा। 81 साल की उम्र में वे सिर्फ दिन गुज़ारने के लिए चेन्नई की सड़कों पर भीख मांगने लगीं। यह हाल छह-सात साल तक चलता रहा।
25 साल के कंटेंट क्रिएटर मोहम्मद आशिक की नज़र उन पर पड़ी और वे रुककर बात करने लगे। जब उन्हें पता चला कि मर्लिन कभी अंग्रेज़ी पढ़ाती थीं, तो उन्होंने उनकी एक छोटी वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर डाल दी। वीडियो देखते ही देखते फैल गया, आशिक ने उनके लिए एक अकाउंट भी बना दिया, @englishwithmerlin, इस उम्मीद में कि शायद इससे उन्हें कुछ मदद मिल जाए। चार दिन में ही उन्हें 5 लाख फॉलोअर्स मिल गए।
आशिक यहीं नहीं रुके। उन्होंने मर्लिन को अंग्रेज़ी में कंटेंट बनाने के लिए भुगतान करने की पेशकश की, यानी एक बार की मदद नहीं बल्कि नियमित कमाई का ज़रिया। इस पूरे मामले पर मिली नज़र उन लोगों तक भी पहुंची जो कभी उन्हें जानते थे, उनके पुराने मकान मालिक के परिवार ने वीडियो देखा, उनसे दोबारा संपर्क किया, और उन्हें रोयापेट्टा के एक वृद्धाश्रम में जगह दिलवाई, जहां अब उनके पास छत और खाना दोनों नियमित रूप से हैं, सड़क का कोना नहीं।
छह-सात साल की बेघरी उस उम्र में जब ज़्यादातर लोग परिवार के साथ आराम से रिटायर होते हैं, इतनी आसानी से मिटती नहीं। लेकिन उनकी हालत इसलिए बदली क्योंकि एक इंसान रुका, आगे बढ़ने के बजाय उनकी कहानी पूछी, और सिर्फ एक वीडियो बनाकर नहीं छोड़ा, आगे भी साथ बना रहा।
Source: The News Minute